महबूबनगर, तेलंगाना में आयोजित 17 वर्षीय महिला वर्ग की राष्ट्रीय स्तर की हैंडबॉल प्रतियोगिता में राजस्थान की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर पदक हासिल किया। इस टीम का नेतृत्व किया बाड़मेर जिले के सेड़वा ग्राम पंचायत की सुनीता पिंडेल ने, जो न केवल अपनी मेहनत और समर्पण से राज्य का नाम रोशन कर रही हैं, बल्कि पूरे सीमांत क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं।
यह प्रतियोगिता राजस्थान और मेज़बान राज्य तेलंगाना की टीम के बीच फाइनल मुकाबला हुआ, जिसमें सुनीता की कप्तानी में राजस्थान की टीम ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। फाइनल में भले ही राजस्थान को सिल्वर पदक मिला, लेकिन इस जीत में जो संघर्ष और उत्साह छुपा है, वह एक बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।
सुनीता पिंडेल बाड़मेर जिले के सेड़वा ग्राम पंचायत की एक साधारण किसान की बेटी हैं। उनके पिता भगवाना राम पिंडेल का हमेशा से यह मानना था कि बेटियां किसी भी दृष्टि से बेटों से कम नहीं होतीं। उनके संघर्ष और सकारात्मक दृष्टिकोण से सुनीता ने न केवल अपनी खेल यात्रा की शुरुआत की, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान भी बनाई।
इसके पीछे उनके कोच भारथा सारण का भी योगदान है, जो वीर तेजा स्कूल सारला के प्रबंधक और कोच हैं। कोच की प्रेरणा और मार्गदर्शन से सुनीता ने खेल के प्रति अपनी लगन को और भी मजबूत किया।सुनीता का यह सिल्वर पदक केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह सीमांत क्षेत्र की बेटियों के लिए एक बड़ा संदेश है। इस जीत से यह साबित हुआ है कि चाहे परिस्थितियाँ कठिन हों, अगर हिम्मत और जुनून सच्चा हो, तो कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। सुनीता ने अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और साहस से यह साबित कर दिया है कि सीमांत क्षेत्र की बेटियाँ भी देश-प्रदेश का नाम रोशन कर सकती हैं।
आज की बेटियां समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए कठिन रास्तों पर चलने के लिए तैयार हैं। वे न केवल खेल, बल्कि शिक्षा, राजनीति, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं। सुनीता का यह पदक हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो समाज की बंदिशों और संघर्षों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिनाइयों का सामना कर रही हैं।
सुनीता पिंडेल का यह सफर यह दर्शाता है कि हर लड़की में वो ताकत और क्षमता होती है, जो उसे महानता की ऊँचाइयों तक ले जा सकती है। इस जीत से न केवल सुनीता ने अपनी मेहनत का फल पाया, बल्कि पूरे राजस्थान और सीमांत क्षेत्र की बेटियों ने यह साबित किया है कि महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।सुनीता की इस उपलब्धि पर पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है, और उनकी यह जीत निश्चित ही राजस्थान की खेल जगत में एक नया अध्याय जोड़ने के रूप में याद रखी जाएगी।
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