Success Story: ₹50,000 की छोटी शुरुआत, अब ₹170 करोड़ का साम्राज्य, बाप-बेटे की जोड़ी ने कैसे किया कमाल?

सिर्फ 50,000 रुपये से शुरू हुआ मुंबई का एक ब्रांड आज 170 करोड़ रुपये का हो गया है। 1999 में हितेश चुन्नीलाल शाह ने इस ब्रांड की नींव रखी थी। आज उनके बेटे हर्षित शाह इसे आगे बढ़ा रहे हैं। यह कंपनी गमलों के अलावा आउटडोर फर्नीचर, शेड नेट और 3D-प्रिंटेड सस्टेनेबल प्लांटर्स भी बनाती है।

नई दिल्‍ली: मुंबई में पिता-पुत्र की जोड़ी ने कमाल कर दिया है। हितेश चुन्नीलाल शाह ने 1999 में छोटे से वर्कशॉप में सस्ते प्लास्टिक के गमलों की समस्या को खत्‍म करने के लिए एक ब्रांड की नींव रखी थी। आज उनके बेटे हर्षित शाह ने इसे पब्लिक लिस्‍टेड कंपनी में बदल दिया है। इसका नाम ‘हर्षदीप हॉर्टिको लिमिटेड’ है। हर्षित मैकेनिकल इंजीनियर और एमबीए हैं। यह ब्रांड 2,200 से ज्‍यादा प्रोडक्‍ट बेचता है। यही नहीं, राइस हस्क और कॉफी बीन्स जैसी चीजों से टिकाऊ, इको-फ्रेंडली गमले बनाकर भारत की गार्डनिंग इंडस्ट्री को नई दिशा दे रहा है। सिर्फ 50,000 की मामूली पूंजी से इसकी शुरुआत हुई थी। छोटे से वर्कशॉप से शुरू हुआ यह ब्रांड आज 170 करोड़ रुपये की दिग्गज कंपनी बन चुका है। आइए, यहां हितेश चुन्नीलाल शाह और उनके बेटे हर्षित शाह की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

Hitesh Chunnilal Shah

50,000 रुपये से छोटी-सी शुरुआत

भारत में गार्डनिंग सिर्फ शौक नहीं है। यह सदियों पुरानी परंपरा है। इसके बावजूद बाजार में हमेशा टिकाऊ, सुंदर और सस्ते गमलों की कमी रही है। इसमें दो ही विकल्‍प थे – घटिया प्लास्टिक के गमले या महंगे इम्पोर्टेड डिजाइन। इसी चुनौती को हल करने के लिए हितेश चुन्नीलाल शाह ने दो दशक पहले सिर्फ 50,000 रुपये की छोटी पूंजी से ठाणे के एक छोटे से वर्कशॉप में ‘हर्षदीप एग्रो प्रोडक्ट्स’ की शुरुआत की। बिना किसी मशीन के उन्होंने उधार के उपकरणों से काम शुरू किया। पुणे की नर्सरीज को साधारण गमले बेचे। उनकी मूल सोच हमेशा क्‍वालिटी, सस्‍टेनेबिलिटी और एफोर्डेबिलिटी पर टिकी रही। यही आज 2,200 से ज्‍यादा उत्पादों के पोर्टफोलियो में विकसित हो चुकी है।

2023 में आया वो बड़ा पल

साल 1999 में शुरू हुई यह यात्रा 2023 में बड़ा मोड़ लेती है। तब यह हर्षदीप हॉर्टिको लिमिटेड नाम से बीएसई पर लिस्‍ट पब्लिक लिमिटेड कंपनी बन जाती है। इस बदलाव के पीछे हितेश के बेटे हर्षित शाह का हाथ है। उन्‍होंने 2020 में कारोबार संभाला। हर्षित ने पिता के फैमिली-रन ऑपरेशन को कॉर्पोरेट ब्रांड में बदल दिया। ऑपरेशन को स्ट्रीमलाइन किया, प्रोडक्ट लाइन बढ़ाई और ब्रांडिंग पर फोकस क‍िया। आज कंपनी केवल गमले ही नहीं, बल्कि आउटडोर फर्नीचर, ग्रीन शेड नेट और सबसे खास 3D-प्रिंटेड सस्टेनेबल प्लांटर्स भी बनाती है। वे इंजेक्शन मोल्डिंग से लेकर हैंडक्राफ्टेड फाइबरग्लास तक चार तकनीकों का इस्‍तेमाल करते हैं। उत्पादों पर पांच साल की गारंटी देते हैं।

ये बना सफलता का मंत्र

हितेश और हर्षित के वेंचर को जो चीज बाजार में सबसे अलग बनाती है, वह है सस्टेनेबिलिटी पर उनका जोर। वे अपने इको-फ्रेंडली गमलों में चावल की भूसी, कॉफी बीन्स और गन्ने का छिलका जैसे जैविक पदार्थों का इस्‍तेमाल करते हैं। हर टिकाऊ गमले का 50% हिस्सा जैविक पदार्थों से बना होता है। वे वर्जिन प्लास्टिक की जगह केवल रीसाइकिल्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं। यह कदम उनके कार्बन फुटप्रिंट को कम करता है। इसके अलावा, इन गमलों में बायो-बेस्ड कलर का इस्‍तेमाल होता है। इससे फाइनल प्रोडक्‍ट पूरी तरह से केमिकल-फ्री होता है, जो ग्राहकों का विश्वास जीतता है।

तेजी से हुआ है विस्‍तार

लोकल नर्सरीज को सप्लाई करने से लेकर आज वेंचर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर काम कर रहा है। हितेश और हर्षित की कंपनी के 7 शोरूम (मुंबई, पुणे, दिल्ली, आदि में) और 500 से ज्‍यादा डिस्‍ट्रीब्‍यूटर हैं। उनके पास तीन बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्‍लांट(भिवंडी, पुणे और दिल्ली) हैं। एम्स्टर्डम में एक इंटरनेशन सेल्‍स ऑफिस भी है। हर्षित के जुड़ने के बाद कंपनी की टीम 75 से बढ़कर 300 से ज्‍यादा हो गई। रेवेन्‍यू 30 करोड़ से बढ़कर 60 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी का वैल्‍यूएशन 170 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। 2024 में 45 रुपये के शेयर मूल्य पर आईपीओ लाने के बाद आज उनका शेयर मूल्य लगभग 97 रुपये के आसपास है। उनका अगला लक्ष्य दुबई, अमेरिका और यूरोप में अंतरराष्‍ट्रीय शोरूम खोलना और बागवानी के लिए ‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ बनना ह

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