NASA ने खोज निकाला ‘नरक का दरवाजा’ कहे जाने वाले अंतरिक्ष के सबसे रहस्यमयी ब्लैक होल को……

लेखक:- जसा राम

कार्य:- विद्यार्थी एवं न्यूज़ इंडिया रिपोर्टर

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नासा ने हमारी आकाशगंगा के सबसे निकट ऐसे विशाल ब्लैक होल की खोज की है, जिसे समझना बहुत मुश्किल है। इसे कुछ वैज्ञानिक नरक का द्वार भी कह रहे हैं। यह खोज नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा खींची गई तस्वीरों से की गई है।

NASA ने खोज निकाला 'नरक का दरवाजा', अंतरिक्ष के सबसे रहस्यमयी ब्लैक होल से पर्दा उठा

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक बेहद महत्वपूर्ण और हैरान कर देने वाली खोज का खुलासा किया है, जिसमें M87 आकाशगंगा के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल मौजूद है। इसका आकार सूर्य के 2.6 अरब गुना बड़ा है। इस खोज ने ब्रह्मांड के रहस्यमयी नियमों पर फिर से बहस छेड़ दी है और पूरे वैज्ञानिक समुदाय को चौंका दिया है। कुछ वैज्ञानिक इसे “नर्क का द्वार” भी कह रहे हैं। इसे देखना और समझना दोनों ही चुनौतीपूर्ण है।

यह खोज नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा खींची गई तस्वीरों के माध्यम से की गई है, जिसमें M87 के केंद्र में एक शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल का पता चला। पृथ्वी से 52 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित इस विशाल आकाशगंगा में 100 बिलियन से अधिक तारे हैं, लेकिन इसके केंद्र में ऐसा अजूबा है, जो समझ से बाहर है। यह ब्लैक होल अपनी विशाल गुरुत्वाकर्षण शक्ति से अंतरिक्ष और समय को विकृत कर देता है, जिससे यह एक ऐसे रहस्यमय और डरावने तत्व के रूप में जाना जाता है, जिसे देखना और समझना दोनों ही चुनौतीपूर्ण हैl

इतिहास में पहली बार ऐसा ब्लैक होल

वैज्ञानिकों ने इस तरह के ब्लैक होल की मौजूदगी का अनुमान पहले ही लगा लिया था, लेकिन इसकी वास्तविकता और प्रभावों को समझना मुश्किल था। 1978 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के खगोलशास्त्री पीटर यंग और उनकी टीम ने M87 के केंद्र में एक अद्वितीय गुरुत्वाकर्षण शक्ति का सुझाव दिया था, लेकिन उस समय पृथ्वी पर स्थित दूरबीनों से की गई टिप्पणियां उस सिद्धांत को सटीक रूप से साबित करने में सक्षम नहीं थीं। लेकिन, हालिया तस्वीरों और टॉड लॉयर, सैंड्रा फेबर और गैरी लिंड्स जैसे खगोलज्ञों द्वारा इन तस्वीरों का विश्लेषण करने के बाद इस ब्लैक होल का अस्तित्व अब न केवल सिद्ध हो चुका है, बल्कि इसके प्रभावों को भी स्पष्ट रूप से समझा जा रहा है।

ब्लैक होल की असीमित ऊर्जा

M87 की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक है इसका ध्रुवीय प्लाज्मा प्रवाह, जिसे दशकों पहले पहली बार देखा गया था। यह प्लाज्मा हजारों प्रकाशवर्षों तक फैला है और इसे ब्लैक होल द्वारा उत्पन्न अत्यधिक ऊर्जा से शक्ति मिलती है। इस आकाशगंगा के केंद्र से X-रे और रेडियो विकिरण भी निकलते हैं, जो इसे एक शक्तिशाली और ऊर्जा से भरपूर आकाशीय वस्तु के रूप में स्थापित करते हैं।

ब्लैक होल का प्रभाव

M87 के केंद्र में तारों का घनत्व भी अविश्वसनीय रूप से ज्यादा है। यह घनत्व सामान्य विशाल आकाशगंगाओं के मुकाबले कम से कम 300 गुना अधिक है और हमारे सूर्य के आस-पास के तारे के क्षेत्र से 1000 गुना घना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस अत्यधिक घनत्व का कारण ब्लैक होल की विशाल गुरुत्वाकर्षण शक्ति है, जो पदार्थ को अपने इवेंट होराइजन (वापस लौटने का बिंदु) की ओर खींचता हैl

ब्लैक होल्स: ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य

ब्लैक होल्स वे क्षेत्र होते हैं जहां गुरुत्वाकर्षण इतनी ताकतवर होती है कि प्रकाश भी वहां से भाग नहीं सकता। ये तब बनते हैं जब विशाल तारे अपने अंत में गिरकर अत्यधिक सघन और घने हो जाते हैं। ब्लैक होल्स की शक्तियां इतनी प्रचंड होती हैं कि ये समय और अंतरिक्ष को विकृत कर सकते हैं और पूरे तारों को निगलने की क्षमता रखते हैं।

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