नेहरू संयोग से बने प्रधानमंत्री, सरदार पटेल और अंबेडकर थे हकदार: मनोहर लाल खट्टर

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में एक बयान देकर भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू केवल संयोग से प्रधानमंत्री बने, जबकि सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव अंबेडकर इस पद के असली हकदार थे। खट्टर ने यह टिप्पणी एक सार्वजनिक कार्यक्रम में की, जहां वह भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त कर रहे थे।

क्या कहा खट्टर ने?

मनोहर लाल खट्टर ने कहा, “नेहरू जी का प्रधानमंत्री बनना इतिहास का संयोग था। कांग्रेस पार्टी के भीतर अधिकतर लोग सरदार पटेल को प्रधानमंत्री देखना चाहते थे। इसके बावजूद, गांधी जी के समर्थन के कारण नेहरू जी को यह मौका मिला।” खट्टर ने यह भी जोड़ा कि अगर सरदार पटेल प्रधानमंत्री बने होते, तो भारत का राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य आज कुछ अलग होता।

डॉ. अंबेडकर का जिक्र

डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए खट्टर ने कहा कि वह भी प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार थे। उन्होंने अंबेडकर की विद्वता, उनकी नीतियों और भारतीय संविधान के निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। खट्टर ने कहा, “डॉ. अंबेडकर ने भारत को एक मजबूत संविधान दिया। उनकी दृष्टि और नेतृत्व क्षमता अद्वितीय थी।”

इतिहास में बहस का विषय

नेहरू के प्रधानमंत्री बनने का मुद्दा दशकों से बहस का विषय रहा है। 1946 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव में सरदार पटेल को अधिक समर्थन मिला था, लेकिन महात्मा गांधी के हस्तक्षेप के बाद नेहरू को अध्यक्ष चुना गया। कांग्रेस अध्यक्ष का पद उस समय प्रधानमंत्री पद के लिए मार्ग प्रशस्त करता था।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

खट्टर के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने इसे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का प्रयास बताया। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि नेहरू का चयन एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा था और गांधी जी की सहमति से हुआ था।

इतिहास की पुनर्व्याख्या या राजनीतिक बयान?

मनोहर लाल खट्टर का यह बयान इतिहास की पुनर्व्याख्या के रूप में देखा जा रहा है या इसे महज राजनीतिक बयान माना जाए, यह बहस का विषय बना हुआ है। ऐसे बयान स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं के योगदान पर नए दृष्टिकोण पेश करते हैं, लेकिन साथ ही इतिहासकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी करते हैं।

निष्कर्ष

खट्टर के बयान ने नेहरू, सरदार पटेल और अंबेडकर जैसे महान नेताओं के योगदान पर चर्चा को एक बार फिर तेज कर दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया कैसी होती है।

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