स्वामी विवेकानंद | पूरे भारतवर्ष में स्वामी विवेकानंद जी का अवतरण दिवस अत्यंत श्रद्धा और आदर के साथ मनाया जा रहा है। 12 जनवरी का यह दिन हमारे राष्ट्र में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में समर्पित है। यह दिन भारत के महान संत, दार्शनिक और युवा प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद को उनकी शिक्षा, विचारधारा और अमूल्य योगदान के लिए समर्पित है। स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन में युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, “उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो।” उनका यह संदेश आज भी हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है। यह प्रेरणा देता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है।

विपरीत परिस्थितियों में सकारात्मकता का संदेश स्वामी विवेकानंद ने सिखाया कि जीवन में कठिनाइयों का सामना करने के लिए धैर्य, साहस और अनवरत प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने समय का सदुपयोग करना चाहिए और आलस्य या प्रमाद से बचना चाहिए। उनका मानना था कि यदि मनुष्य अपने उद्देश्य के प्रति समर्पित और दृढ़ रहता है, तो सफलता निश्चित रूप से उसके चरण चूमेगी। उनका यह दृष्टिकोण विशेष रूप से आज की युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में, जब तकनीकी और सामाजिक चुनौतियां बढ़ रही हैं, स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनकी शिक्षाएं युवाओं को आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और धैर्य के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
राष्ट्रीय युवा दिवस: एक प्रेरणादायक पहल भारत सरकार ने 1984 में स्वामी विवेकानंद के विचारों और उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया। इस दिन देशभर में विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें विवेकानंद के विचारों और जीवन पर चर्चा की जाती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा स्वामी विवेकानंद का मानना था कि युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होते हैं। यदि युवा जागरूक, शिक्षित और प्रेरित होंगे, तो देश भी प्रगति करेगा। उन्होंने युवाओं से कहा, “तुम जो भी सोचोगे, वही बनोगे। यदि तुम सोचते हो कि तुम कमजोर हो, तो कमजोर बनोगे। और यदि तुम सोचते हो कि तुम मजबूत हो, तो निश्चित ही मजबूत बनोगे।”
आलस्य और प्रमाद से बचने की सीख स्वामी विवेकानंद ने समय के महत्व को समझाते हुए कहा कि हमें हर क्षण का सदुपयोग करना चाहिए। आलस्य और प्रमाद मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं, जो उसे अपने लक्ष्य से भटका सकते हैं। उन्होंने युवाओं को चेताया कि जो समय को व्यर्थ करता है, वह अपने जीवन में कुछ नहीं कर सकता।
निष्कर्ष आज के दिन, जब हम स्वामी विवेकानंद जी के चरणों में समर्पित भाव से वंदन करते हैं, हमें उनके जीवन और विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लेना चाहिए। उनके आदर्श और शिक्षाएं हमें जीवन में सकारात्मकता, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। स्वामी विवेकानंद जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि मनुष्य अपने लक्ष्य पर अडिग रहे और पूरी निष्ठा से प्रयास करे, तो सफलता निश्चित रूप से उसके पास आएगी। उनके विचार न केवल हमारे देश के युवाओं को, बल्कि पूरी मानवता को दिशा देने का काम करते हैं।
आइए, हम सब मिलकर उनके दिखाए मार्ग पर चलें और अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
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