कोचिंग स्टूडेंट्स के बीच आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। सरकार ने घोषणा की है कि वह आत्महत्या रोकने के संबंध में एक विधेयक पेश करेगी। यह विधेयक 31 जनवरी से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकार ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में जानकारी दी।
हाईकोर्ट ने लिया स्वप्रेरित प्रसंज्ञान
राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब 9 साल पहले कोटा में कोचिंग स्टूडेंट्स द्वारा आत्महत्या की घटनाओं पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए एक याचिका दर्ज की थी। इसके बाद से इस मामले की सुनवाई जारी है। सोमवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस वीके भारवानी शामिल थे, ने राज्य सरकार के कदमों की जानकारी मांगी थी।
सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने अदालत को बताया कि कोचिंग सेंटर्स के संचालन के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है और आगामी विधानसभा सत्र में इस पर विधेयक लाया जाएगा। कोर्ट ने सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को तय की है।
केंद्र सरकार की गाइडलाइंस लागू करने की सलाह
पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट में प्रदेश के 33 जिलों में संचालित कोचिंग सेंटर्स की सूची पेश की थी। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्यों न कानून बनने तक कोचिंग सेंटर्स के लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइंस को लागू कराया जाए। न्यायमित्र वरिष्ठ वकील सुधीर गुप्ता ने भी सुझाव दिया कि जब तक राज्य सरकार का कानून लागू नहीं होता, तब तक केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार कोचिंग सेंटर्स का रजिस्ट्रेशन किया जाए।

कोचिंग सेंटर्स पर सख्ती जरूरी
कोटा, जो देशभर में कोचिंग शिक्षा का केंद्र माना जाता है, वहां आत्महत्या की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। छात्रों पर पढ़ाई का दबाव, मानसिक तनाव, और माता-पिता की अपेक्षाओं का भार इन घटनाओं के पीछे मुख्य कारण माने जा रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार ने कोचिंग सेंटर्स के लिए नियम-कायदे तय करने और छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने पर जोर दिया है।
अगले कदम
सरकार के अनुसार, विधेयक में कोचिंग सेंटर्स के संचालन, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, छात्रों की काउंसलिंग और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के प्रावधान शामिल होंगे। इसके अलावा, छात्रों को तनावमुक्त वातावरण प्रदान करने के लिए कोचिंग सेंटर्स को जिम्मेदार बनाया जाएगा।
समाज में जागरूकता की आवश्यकता

इस समस्या का समाधान केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है। छात्रों और उनके परिवारों में जागरूकता बढ़ाने की भी आवश्यकता है। शिक्षा के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देकर ही इस गंभीर समस्या का समाधान संभव है।
सरकार के इस कदम से उम्मीद है कि कोचिंग स्टूडेंट्स की आत्महत्या की घटनाओं में कमी आएगी और उन्हें एक सकारात्मक और सहयोगी वातावरण प्रदान किया जा सकेगा।
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