परिचय
क्या आपने कभी सोचा है कि एक PhD या BTech पास छात्र चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन करेगा? यह सुनकर हैरानी होती है, लेकिन यह कोई कल्पना नहीं बल्कि हकीकत है। राजस्थान में हाल ही में चपरासी के पदों पर भर्ती के लिए निकली वैकेंसी ने पूरे देश का ध्यान खींचा, जब हजारों highly qualified युवा—जिनके पास PhD, BTech, B.Ed जैसी डिग्रियाँ थीं—ने महज 10वीं पास के लिए आरक्षित इस पद के लिए आवेदन कर दिया।
क्या है मामला?
राजस्थान सरकार ने हाल ही में चपरासी के कुछ पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए। न्यूनतम योग्यता थी – 10वीं पास। लेकिन जब आवेदन पत्रों की जांच की गई, तो सामने आया कि कई आवेदकों के पास उच्च शिक्षा की डिग्रियाँ हैं – जिनमें इंजीनियरिंग, शिक्षा और शोध में उच्चतम योग्यता शामिल है।
ऐसी नौबत क्यों आई?
इसका सबसे बड़ा कारण है – बेरोजगारी।भारत में, विशेष रूप से राजस्थान जैसे राज्यों में, बेरोजगारी की दर चिंताजनक है। युवा वर्षों तक पढ़ाई करते हैं, महंगी डिग्रियाँ हासिल करते हैं, लेकिन जब नौकरी की बात आती है, तो उनके पास सीमित विकल्प रह जाते हैं। सरकारी नौकरी की सुरक्षा और स्थायित्व की चाह में वे किसी भी स्तर की नौकरी के लिए तैयार हैं—even अगर वह चपरासी की हो।
शिक्षा प्रणाली पर सवाल
जब एक B.Ed पास युवा स्कूल में शिक्षक नहीं बन पा रहा है, या जब BTech पास युवा तकनीकी क्षेत्र में रोजगार से वंचित रह जाता है—तो यह शिक्षा प्रणाली और रोजगार नीति दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या हमारी शिक्षा युवाओं को नौकरी के लायक बना रही है? या फिर हमारे सिस्टम में कहीं गहरी खामी है?
सरकार और समाज की भूमिका
सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वो युवाओं को उनके योग्य रोजगार देने के लिए मजबूत नीतियाँ बनाए। साथ ही, समाज को भी यह समझने की जरूरत है कि केवल डिग्री होना ही काफी नहीं है—व्यावहारिक कौशल, अवसर और मार्गदर्शन भी उतना ही जरूरी है।
निष्कर्ष
राजस्थान की यह घटना हमें आईना दिखाती है। यह सिर्फ एक राज्य की बात नहीं, बल्कि पूरे देश की स्थिति का प्रतिबिंब है। जब एक highly educated युवा चपरासी बनने को मजबूर हो, तो यह समय है कि हम नीतियों, शिक्षा प्रणाली और रोजगार के अवसरों पर गंभीरता से विचार करें।
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